एक सर उखाड़ कर दूसरे सर पे लगा दिया। Amazing facts रोचक तथ्य

दोस्तो मेरी बातो को ध्यान से समझिएगा मान लीजिए एक आदमी का एक खतरनाक एक्सीडेंट हो जाता है। accident के बजेसे उस आदमी के गर्दन के निचेगा भाग पूरी तरह काम करना बंद कर देता है। लेकिन उस आदमी के ऊपर का भाग उसका Brain एकदम अच्छी तरह काम करता है। अब एक सवाल का जवाब दीजिए क्या उस आदमी का दिमाग transplant करके किसी और शरीर मैं जोड़ा जा सकता है।

 यह एक वैसा सवाल है जो दुनियाभर के scientist के दिमाग मैं लंबे समय से परेशानी कर बैठा है उनका मानना है अगर किसी आदमी का liver ट्रांसप्लांट हो सकता है heart ट्रांसप्लांट हो सकता है skin ट्रांसप्लांट हो सकती है hair ट्रांसप्लांट हो सकते है तो किसका दिमाग क्यों नही। शरीर के बाकी अंगो की तरह किसी इंसान के दिमाग को ट्रांसप्लांट करके किसी के शरीर से क्यू नही जोड़ा जा सकता।

 इसी बात को सोचते हुए साल १९०० के दौरान एक British वैज्ञानिक ने एक अलग नसल के कुत्ते की खोपड़ी को उसके शरीर से अलग करके दुसरे नसल के कुत्ते के शरीर के साथ जोड़ दिया वैज्ञानिक को इस बात का भरोसा था की जैसी ही surgery पूरी होगी कुत्ता होश मैं आ जायेगा। लेकिन अफसोस की बात operation के एक सप्ताह बाद भी कुत्ता होश में नहीं आया।फिर बता चला की उस कुत्ते की मौत हो चुकी 

है।

 इसके बाद लगभग साल १९६० के दौरान एक बंदर के साथ ऐसा किया गया इस बार वैज्ञानिकों थोड़ी सफलता मिली और हुआ ये खोपड़ी को अलग करके किसी दूसरे बंदर के साथ जुड़ने के बात बंदर होश मैं भी आ गया लेकिन अफसोस की बंदर के शरीर का कोई भी अंग काम नही कर रहा था। और लगभग नौ दिनों बात उस बंदर की मौत हो गई।

 इसके बाद लगातार scientist इस बात पर खोज करते रहे की किस तरह किसी इंसान की खोपड़ी ट्रांसप्लांट की जा सकती है। अब आगे मैं जो आपको बताने जा रहा हु उसे सुनके बाद आप कहेंगे की ऐसे भी experiment वैज्ञानिकों ने किए है। लगभग ८० साल का वक्त निकल चुका था जिसके बाद साल १९८२ मैं न्यूयॉर्क सिटी के mount Sinai मेडिकल कॉलेज मैं एक डॉक्टर ने दो चूहों के ब्रेन ट्रांसप्लांट की कोशिश की डॉक्टर ने कही घंटे लगातार कोशिश करने के बाद इस ऑपरेशन को successfully कर दिया और हैरानी की बात चूहा एकदम सही सलामत था और उसक हर अंग ठीक तरीके से काम कर रहा था। 

जिसके बाद ६जून१९९८ मैं एक medical surgeon के टीम ने वर्ल्ड का सबसे पहला ट्रांसप्लांट किया जिसमे उन्होंने इंसान दिमाग के एक cell को ट्रांसप्लांट किया था यानिकि डॉक्टर ज्यादा बड़ा रिस्क नहीं लेना चाहते 

थे इसलिए पूरा दिमाग को ट्रांसप्लांट करने के बजाए दिमाग के छोटेसे हिस्से को ट्रांसप्लांट किया गया ट्रांसप्लांट ठीक ठाक हो गया लेकिन उस ६२ साल की महिला के दोनो पैर पैरालाइज हो गए।

 

निष्कर्ष: अभी तक इस शोध मैं बहुत सारे वैज्ञानिक भी तयार है पर सरकारी permission और इंसानी जीवित हानि के स्तर देखते ऐसा नहीं हो पाया है




Leave a Comment